"कर लो नमन स्वीकार तुम"
मां महामाया शाक्य
की कोख से जन्मे एवं भारत मां की आंचल में पले-बढे शाक्य मुनि गौतम बुद्ध ने सदैव
"सम्यकता, शुद्धता एवं शांतिप्रियता" पर ज़ोर दिया ताकि "सर्वजन हिताय-सर्वजन
सुखाय" जैसे "वैचारिक धरातल" का निर्माण विश्वस्तर पर हो सके| उत्तराखंड भारत का एक ऐसा भू-भाग(प्रांत) है, जो प्राकृतिक रूप से "सम्यक, शांति एवं शुद्ध" वैचारिक धरातल हेतु एकदम परिपूर्ण है| यह बोधगया तथा राजगीर जैसा शुद्ध सम्यक
"विपश्यना" करणे लायक क्षेत्र है| अर्थात मनुष्य को जीवन तथा जीवनगति देने वाले तत्वों (पंचतत्त्व) को महसूस करने-देखने -परखने का ज्ञान प्रदान करने वाला क्षेत्र है| इसीलिये वैदिक काल के पूर्व अर्थात मौर्यकालीन
युग में यह कार्य (वर्तमान कथित बद्रीनाथ मठ से )उत्तराखंड से भी होता रहा है| आज फिर एक बार सुअवसर है, इसीलिये सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय जैसे वैचारिक धरातल को
तैयार करने के लिये उत्तराखंड की धरती से आपको हार्दिक नमन है|
जैसे भारत के हर
भू-भाग में आपके समाज के स्वाभिमानी-ईमानदार और कर्मठ लोग हैं, वैसे ही उत्तराखंड में भी मिलते हैं|अनेकों संगठन भी हैं| आवश्यकता है संगठित होकर एक "वैचारिक
धरातल" तैयार करें एवं राष्ट्रस्तर पर संगठित होकर अपना साम्राज्य पुनः
स्थापित करने हेतु, अभियान(जेहाद) में साथ-साथ निकल पड़ें| इसीलिये आज एक बार फिर साथ-साथ
चलने की शक्ति-क्षमता-धैर्य-विवेक-साहस जैसे सहयोग के लिये हम आपका
स्वागत-वंदन-अभिनंदन करते हैं|
इस मंच / सकर्म न्यूज़ लैटर के
माध्यम से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति"सकर्म" समाज के सभी सकारात्मक
तथा सहयोगी दृष्टिकोण रखने वाले श्रद्धेयजनों के साथ मिलकर कार्य करना चाहती है| सकर्म समिति आप सबको हार्दिक नमन करते हुए पुनः
एक बार धीमी गति में तेजी लाना चाहती है| जो प्रेरणात्मक हस्तियों के पदचिन्हों पर चलना
चाहते हैं, यह समिति उन मित्रगणों की विशेष आभारी रहेगी जो
विभिन्न क्षेत्रों के प्रेरणात्मक लोगों का चयन अपनी वर्तमान आवश्यकता के अनुरूप
करने का बेझिझक प्रयास करेंगे|
आज परम आवश्यकता
है कि हमारे संगठन हर क्षेत्र के लिये समान रूप से तैयार हों| राजनितिक, सामाजिक संगठनों के उपसंगठन अनिवार्यत: हों|
जैसे:-
१-)
साहित्यिक-सांस्कृतिक-लेखन
२-)
दर्शन-चिंतन-अध्यात्मिक
३-) खेल-संगीत
४-)
व्यावसायिक-व्यापार
५-) कृषि-बागवानी
६-) इतिहास-भूगोल
७-)
चिकित्सा-शिक्षा
८-) न्याय
-रक्षा-सुरक्षा
९-)
प्रिंट-इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया
१०-) अन्य
११-) सभी का
कंट्रोलर
अंत में निम्न पंक्तियों क साथ एक बार पुनः
हार्दिक अभिनन्दन....
शुद्ध, सम्यक,शांति मन से,
कर लो नमन स्वीकार
तुम|
आओ!विचारों श्रेष्ठतम,
चिंतन करो, हो कौन तुम|
कुछ तुम करो, कुछ हम करें,
मत बैठो, अब मौन तुम|
सद्कर्म हो उपदेश
जैसा ,
तुम ही अशोका, बुद्ध तुम|
तुम सूरसेन, फुले ही तुम,
कुश वंश की संतान
तुम|
अब शुद्ध, सम्यक,शांति मन से,
कर लो नमन स्वीकार
तुम|
धन्यवाद !
kamaal ki speech hai :)
ReplyDelete